मां (Maa): एक ऐसा रिश्ता जो कभी खत्म नहीं होता

मां (Maa)… यह सिर्फ एक शब्द में बल्कि दुनिया है । इंसान की जिंदगी में सबसे पहला रिश्ता मन से ही जुड़ता है । जब बच्चा इस दुनिया में आता है, तब सबसे पहले वह अपनी मां (Maa) की आवाज पहचानता है। मां (Maa) वह होती है जो अपने बच्चों के लिए हर दर्द सह लेती है, लेकिन उसके चेहरे पर आंसू नहीं आने देती है ।

आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि कई बार अपने माता-पिता के लिए समय निकालना भी मुश्किल हो जाता है लेकिन जब तक मां (Maa) हमारे साथ होती है तब तक हमें उसकी कीमत का एहसास नहीं होता और जब मन दूर चली जाती है तब उसकी हर छोटी-छोटी बात, उसकी डांट, उसका प्यार और उसकी दुआएं याद आती हैं ।

मां (Maa)
मां (Maa)

मां (Maa) का इंतजार 

मां (Maa) बचपन का सबसे खूबसूरत रिश्ता

एक छोटे से गांव में एक बूढी मां (Maa) रहती थी । उसका नाम सरस्वती था। उसके पति की मृत्यु कई साल पहले हो चुकी थी अब उसकी पूरी दुनिया उसका इकलौता बेटा रोहित था ।

सरस्वती ने अपने बेटे को बहुत मुश्किलों से पाला था । जब रोहित छोटा था तब घर की हालत बहुत खराब थी । कई बार घर में खाने तक के पैसे नहीं होते थे । लेकिन मां हमेशा अपने बेटे के लिए कुछ न कुछ इंतजाम कर ही लेती थी ।

वह खुद भूखी रह जाती लेकिन बेटे को भर पेट खाना खिलाती थी । रोहित के फटे हुए कपड़े देखकर मां रात भर जाग कर पुराने कपड़े से उसके लिए नए कपड़े सिल देती थी ।

मां (Maa) का त्याग

मां (Maa) अपने बेटे के लिए क्या-क्या नहीं करती ।

खुद भूखी रहकर बच्चों को खाना खिलाती है

अपने सपनों को छोड़कर बच्चों के सपने पूरे करती है

बच्चों के दुख को अपना दुख मानती है

हर मुश्किल में उसके साथ खड़ी रहती है

बिना किसी स्वार्थ के प्यार करती है

सरस्वती भी ऐसी ही मां थी उसने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा अगर घर में पैसे आते तो वह सिर्फ रोहित की पढ़ाई, कपड़ों और जरूरत पर खर्च करती ।

रोहित का बचपन

रोहित बचपन में अपनी मां (Maa) से बहुत प्यार करता था । वह स्कूल से आते ही सबसे पहले मां (Maa) को ढूंढता था । अगर मां कहीं बाहर चली जाती तो रोहित रोने लगता ।

रात को बिना मन की गोद में उसे नींद नहीं आती थी । मां (Maa) उसे कहानी सुनाकर सुलाती थी । कभी राजा रानी की कहानी, कभी गरीब किसान की कहानी, तो कभी ऐसे मां (Maa) की कहानी जो अपने बच्चों के लिए सब कुछ छोड़ देती है ।

रोहित मां से कहता था,

“मां में बड़ा होकर बहुत पैसे कमा लूंगा और तुम्हें कभी दुख नहीं दूंगा।”

मां मुस्कुरा कर कहती,

“मुझे पैसे नहीं चाहिए बेटा बस तू हमेशा मेरे पास रहना ।”

समय के साथ बदलती जिंदगी

पढ़ाई और नौकरी का सपना 

समय बिता गया । रोहित बड़ा हुआ उसने पढ़ाई में बहुत मेहनत की और शहर में नौकरी लग गई । पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई मां (Maa) को लगा अब उसके बेटे की जिंदगी बदल जाएगी ।

जिस दिन रोहित शहर से शहर जाने लगा था । मां सुबह उठकर उसके लिए पसंद का खाना बनाया । उसने लड्डू बनाए, अचार रखा और उसके बैग में चुपके से कुछ पैसे रख दिए । 

जब रोहित जाने लगा तो मां (Maa) की आंखों में आंसू थे । लेकिन उसने अपनेआंसू छुपा लिए ताकि उसका बेटा कमजोर ना पड़े । 

उसने सिर्फ इतना कहकर विदा किया,

“बेटा अपना ध्यान रखना…. और समय मिले तो फोन कर लिया करना ।”

शहर की चमक 

शहर पहुंचने के बाद शुरू शुरू में अपनी मां (Maa) को रोज फोन करता था वह मां (Maa) से पूछता था,

“मां (Maa) खाना खाया दवा लिए ठीक हो ना?”

मन हर बार खुश होकर कहती,

“हां बेटा मैं बिल्कुल ठीक हूं तू बस अपना ध्यान रख”

लेकिन धीरे-धीरे जिंदगी बदलने लगी । ऑफिस का काम बढ़ गया । नए दोस्त बन गए । घूमना फिरना शुरु हो गया । 

अब जो बेटा पहले रोज फोन करता था । वह हफ्ते में एक बार फोन करने लगा  फिर महीने में एक ।

बार मां (Maa) हर दिन फोन का इंतजार करती । वह घर में बाहर चारपाई डालकर बैठ जाती और सड़क की तरफ देखती रहती । उसे लगता था कि शायद आज उसका बेटा आएगा । 

बूढी मां (Maa) का अकेलापन 

गांव के कई लोग कई बार पूछते,

“काकी क्या देख रही हो?”

मां मुस्कुरा कर जवाब देती,

“मेरा बेटा आएगा… उसने कहा था जल्दी आएगा।” 

लेकिन वह जल्दी कभी नहीं आई ।

दिन बीते गए। त्यौहार आते और चले गए । हर त्यौहार पर मां घर साफ करती बेटे का कमरा सजाती और उसके पसंद की मिठाई बनती लेकिन रोहित कभी नहीं आता ।

मां (Maa) हर बार खुद को समझ लेती,

“कोई बात नहीं काम में व्यस्त होगा” 

मां (Maa) की तबीयत बिगड़ने लगी 

बीमारी और इंतजार 

धीरे-धीरे सरस्वती की उम्र बढ़ने लगी । अब उसे चलने में तकलीफ होती थी । घुटने में दर्द रहता था आंखों की रोशनी भी काम हो गई थी । लेकिन उसके चेहरे पर हमेशा एक उम्मीद रहती थी कि एक दिन उसका बेटा जरूर आएगा । एक दिन मां (Maa) की तबीयत बहुत खराब हो गई उसे तेज बुखार था और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी । पड़ोसी उसे डॉक्टर के पास ले गए ।

डॉक्टर ने कहा,

उनकी हालत ठीक नहीं है जितनी जल्दी हो सके उनके बेटे को बुला लो 

पड़ोसी ने रोहित को फोन किया 

रोहित उसे समय ऑफिस की मीटिंग में था 

उसने जल्दी में कहा मैं अभी बहुत बिजी हूं अगले हफ्ते आ जाऊंगा 

पड़ोसी ने कहा बेटी मां (Maa) की हालत बहुत खराब है लेकिन रोहित ने फोन काट दिया 

मां (Maa) की आखिरी इच्छा 

उसे रात मां (Maa) ने अपने पड़ोसी को बुलाया और कहा अगर मेरा बेटा आए तो उसे डिब्बा दे देना। पड़ोसी ने पूछा काकी इसमें क्या है? 

मां (Maa) मुस्कुराई और बोली 

“उसकी पूरी दुनिया”

जब बहुत देर हो चुकी थी

बेटे की वापसी

दो दिन बाद रोहित गांव पहूँचा । उसे रास्ते भर बेचैनी हो रही थी । जब वह घर के बाहर पहूँचा, तो वहाँ बहुत भीड़ लगी हुई थी । 

उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा ।

वह दौड़ते हुए अंदर गया । सामने उसकी मां (Maa) सफेद चद्दर में लिपटी हुई थी

रोहित वहीं जमीन पर बैठ गया उसकी आंखों में आंसू बहने लगे

वह मां (Maa) के पास जाकर बोला

मां (Maa) उठो ना मैं आ गया हूं

लेकिन आप बहुत देर हो चुकी थी 

माँ हमेशा के लिए जा चुकी थी

वह छोटा सा डिब्बा

पड़ोसी ने रोहित को छोटा सा डिब्बा दिया ।

रोहित ने कांपते हाथों से खोला।

अंदर एक पुरानी फोटो थी उसे फोटो में छोटा सा रोहित अपनी मां (Maa) की गोद में बैठा हुआ था दोनों हंस रहे थे फोटो के पीछे मां (Maa) ने लिखा था:

“जब तू छोटा था एक पल भी मेरे बिना नहीं रह पाता था और जब मैं बूढी हो गई तो मैं सिर्फ एक बार तुझे देखना चाहती थी”

यह पढ़ते ही रोहित फूट-फूट कर रोने लगा।

उसे अपनी हर गलती याद आने लगी

मां (Maa) का इंतजार करवाना 

फोन ना करना 

त्योहार पर करना आना 

मां (Maa) की बीमारी को नजरअंदाज करना 

हमेशा काम को मन से ज्यादा समझना

उसे दिन रोहित को समझ आया कि जिंदगी में सबसे कीमती चीज पैसा नहीं बल्कि मां (Maa) का साथ होता है ।

मां (Maa) की ममता क्यों सबसे बड़ी होती है

मां (Maa) का प्यार दुनिया में सबसे अलग क्यों है

मां (Maa) का प्यार किसी शर्त पर नहीं टिका होता है वह अपने बच्चों को हर हाल में प्यार करती है चाहे बच्चा कितना भी बड़ा हो जाए मां (Maa) के लिए वह हमेशा छोटा ही रहता है।

मां (Maa) की कुछ सबसे बड़ी खूबियांँ:

मां (Maa) कभी अपने बच्चों से नाराज नहीं रहती है ।

मां (Maa) हमेशा अपने बच्चों से खुश रहती है ।

मां (Maa) हर हाल में बच्चे का साथ देती है।

मां (Maa) अपने बच्चों के लिए खुद का दर्द भूल जाती है।

मां (Maa) की दुआएं इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है

क्यों जरूरी है मन को समय देना

आज के समय में लोग अपने करियर दोस्त और मोबाइल में इतने व्यस्त हो गए हैं की माता-पिता के लिए समय निकालना भूल जाते हैं लेकिन एक दिन ऐसा आता है सब हमें एहसास होता है कि जिन लोगों को हमने सबसे ज्यादा नजर अंदाज किया, वही लोग हमारे सबसे अपने थे ।

अगर आपकी मां (Maa) के साथ है तो 

उनसे रोज बात करें

उनके साथ समय बिताए

उनकी दवा और सेहत का ध्यान रखें

उन्हें कभी अकेला महसूस न होने दें 

जरूर बताएं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं

कहानी से मिलने वाली सीख

इस कहानी से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है

मां (Maa)-बाप का दिल कभी नहीं दुखाना चाहिए

काम कितना भी जरूरी हो परिवार के लिए समय जरूर निकालिए

बूढ़े माता-पिता को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए

मां (Maa) की दुआओं से बड़ी कोई दौलत नहीं होती

जब तक मां (Maa) हमारे साथ है उसकी कद्र करना चाहिए

निष्कर्ष 

मां (maa) एक रिश्ता नहीं वह पूरी जिंदगी है जब हम छोटे होते हैं।तब मां (Maa) हमें चलना सिखाती है । जब हम गिरते हैं तो मां (Maa) हमें उठाना सिखाती है । लेकिन जब मां बुढ़्ढ़ी हो जाती है तब हमारी जिम्मेदारी होती है कि हम उसका सहारा बने ।

बहुत सारे लोग जिंदगी की भाग-दौड़ में अब भूल जाते हैं कि मां हमेशा साथ नहीं रहती । एक दिन ऐसा आता है जब सिर्फ उसकी यादें रह जाती है । इसलिए अगर आपकी मां (Maa) आज आपके साथ है तो उसके साथ बैठी है उससे बात कीजिए उसका हाथ पकड़िए और उसे बताइए कि वह आपके लिए कितना जरूरी है क्योंकि दुनिया में सब कुछ दोबारा मिल सकता है मां (Maa) कभी दोबारा नहीं मिलती ।

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