पिता और बेटी का रिश्ता दुनिया का सबसे खूबसूरत और गहरा रिश्ता होता है । पिता का प्यार अक्सर शब्दों से नहीं बल्कि उसके चुप्पी, उसके मेहनत और उसके बलिदान से महसूस से किया जा सकता है । यह पिता और बेटी की कहानी किसी फिल्म पटकथा से कम नहीं बल्कि असल जिंदगी के उन लम्हों से जुड़ी है जो हर किसी के दिल को छू लेती है । तो आइए पिता और बेटी की कहानी प्यार, बलिदान और दर्द की दास्तान इस कहानी में विस्तार से पढ़ते हैं ।

बेटी का जन्म
रवि जब पहली बार पिता बना तो उसकी आंखों से खुशी के आंसू रुक नहीं रहे थे अस्पताल की उस छोटे से कमरे में जहां उसकी पत्नी लेती थीउसने अपनी नन्ही सी जान सिया को गोद में लिया उसे पर उसे लगा जैसे उसकी पूरी जिंदगी बदल गई ।
“बेटी मेरी दुनिया है…… अब मैं उसके लिए जिऊंगा ।”
पिता का संघर्ष
रवि एक छोटे से शहर में प्राइवेट नौकरी करता था सैलरी कम थी लेकिन सपने बड़े थे सुबह जल्दी उठकर ऑफिस जाना देर रात तक काम करना उसके चेहरे पर थकान साफ-साफ झलक दिखती थी लेकिन जब घर जाकर सिया की हंसी सुनता था उसकी मासूम आवाज पापा आ गए पापा आ गए तो सारी थकान दूर हो जाती थी
“यही पिता का प्यार बिना शब्दों के जताया गया है”
बेटी की छोटी-छोटी खुशियां
सिया को गुड़िया से खेलने कहानी सुना पापा के कंधे पर बैठकर आसमान देखना बहुत पसंद था रवि चाहे कितना भी व्यस्त हो लेकिन सिया के हर इच्छा पूरी करता था उसके लिए स्कूल बैग से लेकर रंगीन पेंसिल तक सब लाकर देता । वह कहता था “बेटी तेरा सपना ही मेरा सपना है ।”
समाज की बातें और पिता का डर
छोटे l में अक्सर लोग कहते हैं बेटी है कल पराई हो जाएगी बेटे का सहारा होना चाहिए लेकिन रवि हमेशा जवाब देता मेरे लिए बेटी ही सबसे बड़ा सहारा है यहां से हमें समझ आता है कि पिता बेटी का रिश्ता कितना अनमोल है ।
बेटी की पढ़ाई और सपना
सिया बड़ी हो रही थी उसने अपने पापा से कहा पापा मुझे डॉक्टर बनना है रवि की आंखों में चमक आ गई उसे पता था कि उसके पास ज्यादा पैसे नहीं है लेकिन बेटी का सपना अधूरा नहीं छोड़ सकता उसने ओवर टाइम काम करना शुरू किया कई बार अपने शॉप छोड़ दिए सिर्फ एक मकसद था बेटी का सपना पूरा करना ।
पिता का बलिदान
धीरे-धीरे हालत बिगड़ने लगे नौकरी में प्रमोशन नहीं मिला सैलरी भी उतनी ही रही लेकिन बेटी की पढ़ाई के लिए अभिनय कर्ज लिया घर के खर्च काट दिए खुद नहीं सब तक नहीं खरीदी सिया ने कई बार देखा कि पापा देर रात खिड़की से आसमान देख रहे हैं जैसे खुद से लड़ रहे हो लेकिन सुबह वही मुस्कुराते हुए कहते बेटा पढ़ाई पर ध्यान दो बाकी सब में देख लूंगा ।
दर्दनाक मोड़
जिंदगी हर वक्त इंसान की उम्मीद के मुताबिक नहीं चलती एक दिन रवि की तबीयत अचानक बिगड़ गई डॉक्टर ने बताया कि उसका लीवर कमजोर हो गया है और उसे आराम की जरूरत है लेकिन रवि जानता था कि अगर वह आराम करेगा तो बेटी की फीस कैसे भरेगा उसने अपनी बीमारी छुपी और काम करता रहा ।
बेटी की आखिरी याद
बीतते गए सिया डॉक्टर बन गई लेकिन डिग्री लेने से पहले ही रवि की तबीयत और खराब हो गईअस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे उसने बेटी का हाथ पकड़ा और कहा बेटा आज मैं चैन से जा सकता हूं क्योंकि तू अपना सपना पूरा कर चुकी हैसिया की आंखों में आंसू झर झर बह रहे थेवह बार-बार कह रही थी पापा आप मुझे छोड़कर नहीं जा सकतेलेकिन किस्मत को शायद मंजूर नहीं था रवि ने बेटी का चेहरा आखिरी बार देखा हल्की मुस्कान दी और आंखें बंद कर ली
अधूरी दास्तान
आज भी सी अपने क्लीनिक में काम करते हुए हर मरीज से पहले अपने पापा की तस्वीर को देखते हैं उसके लिए सिर्फ पिता की तस्वीर नहीं बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बड़ा सहारा है यह पिता और बेटी की अधूरी कहानी हर किसी को यह सिखाती है कि-
- बेटियां बोझ नहीं होती
- पिता का प्यार सबसे गहरा होता है
- और पिता के बलिदान कभी बुलाए नहीं जा सकते हैं
निष्कर्ष
और बेटी का रिश्ता शब्दों से परे है या कहानी सिर्फ रवि और सिया की नहीं बल्कि हर उसे पिता की है जो अपने बेटी के लिए दिन रात मेहनत करता है सपनों को त्याग देता है और अपनी जिंदगी कुर्बान कर देता है
